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ट्राई के नए नियमों पर केबल आपरेटरों की मनमानी, पहले से मंहगा हुआ केबल कनैक्सन

ग्राहकों की पहुंच से दूर हुए मनपसंद चैनल, फ्री चैनलों के भी देने पड़ रहे इतने रूपये

ट्राई के नए नियमों पर केबल आपरेटरों की मनमानी, पहले से मंहगा हुआ केबल कनैक्सन

ग्राहकों की पहुंच से दूर हुए मनपसंद चैनल, फ्री चैनलों के भी देने पड़ रहे इतने रूपये

देहरादून। टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया ट्राई के नए नियम और केबल ऑपरेटरों के पैक ऑफर ग्राहकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। ग्राहक को जितने चैनल पहले ढाई सौ रुपये में देखने को मिल जाते थे। अब उतने चैनलों के लिए अब पांच सौ रुपये से ज्यादा देने पड़ रहे हैं। इसके अलावा भी ग्राहकों को कई प्रकार की दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है। ट्राई के नए नियमों के अनुसार ग्राहकों को जो चैनल देखने हैं केवल उन्हीं का भुगतान करना होगा। पैक की पैकिंग ग्राहकों के जी का जंजाल बन गई है। ट्राई ने यूं तो ग्राहकों को हर चैनल के हिसाब से भुगतान करने की छूट दी है। लेकिन शहर के केबल ऑपरेटर अलग-अलग तरह के पैक बनाकर ग्राहकों को दे रहे हैं।
काम के चैनल कर दिए बंद
ऑपरेटर अब ग्राहकों से बिना पूछे चैनल थोपे रहे हैं। फ्री टू एयर में हिन्दी के साथ अन्य भाषाओं के उन चैनलों की भी भरमार है,जिन्हें हिन्दी भाषी दर्शक समझते ही नहीं है। एक ग्राहक मोहन ने बताया कि कुछ समझ नहीं आ रहा है। बिना मतलब के चैनल दिखाए जा रहे हैं और काम के चैनल बंद कर दिए गए हैं। प्रगति बिहार निवासी राजेश ने बताया कि पहले जितने चैनल ढाई सौ रुपये में देखने को मिल जाते थे। उतने चैनल लेने के लिए अब पांच सौ रुपये मांगे जा रहे हैं। प्रदीप बिष्ट ने बताया कि केबल ऑपरेटरों को तीन दिन से लगातार पंसदीदा चैनल शुरू करने को कहा जा रहा है,लेकिन ऑपरेटर बार-बार ऑफिस बुलाकर बात करने को कह रहा है। अर्चना ने बताया कि ट्रैवल चैनल उनका पसंदीदा है। लेकिन इसे बंद करके फ्री टू एयर चैनल दिखाए जा रहे हैं।
केबल उपभोक्ता हैरान और परेशान
केबल उपभोक्ताओं की तो वह हैरान और परेशान हैं। किस चैनल का चुनाव करें और किसे छोड़ें, इसी उधेड़बुन में चैनल चुनने की ट्राई की समयसीमा भी कब निकल गई, उन्हें इसका भान ही नहीं हो पाया। जिस कारण उनके मनपसंद चैनलों की सेवाएं बंद हो चुकी हैं और उन्हें फ्री-टू-एयर वाले 100 चैनलों से काम चलाना पड़ रहा है। दून में इस समय करीब 2.30 लाख केबल उपभोक्ता हैं और इनमें से लगभग डेढ़ लाख उपभोक्ताओं की पेड चैनलों की सेवाएं बंद भी हो चुकी हैं। कई जगह केबल ऑपरेटरों ने अभी चैनलों की सूची तक उपभोक्ताओं को नहीं दी है। जबकि डेन व प्राइम सिटी केबल से जुड़े केबल ऑपरेटरों ने चैनलों के दाम के अनुरूप सूची देने की जगह उन्हें अपने हिसाब से चैनलों का पैकेज बनाकर थमा दिया है। कुल मिलाकर उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ना तय है या फिर उन्हें बजट के हिसाब से अपनी जरूरतें सीमित करनी पड़ जाएंगी। समीकरण जो भी बनें, लेकिन यह नौबत आ गई है कि कम चैनल हिस्से में आने के बाद भी उपभोक्ताओं को पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
डेन की ओर से दिए जा रहे ऑफर पर गौर करें तो और इसी के अनुरूप चैनलों का चुनाव किया जाए तो जो चैनल पूर्व में 250 रुपये में देखे जा रहे थे, उनकी राशि अब जीएसटी मिलाकर 501 रुपये हो रही है। इस ऑफर में कई अनावश्यक चैनलों का हवाला देकर कुछ कम पर आकर बात की जाए तो इसका बजट भी 419 रुपये पहुंच रहा है। इसके बाद कुछ ढंग के चैनलों को मिलाकर यह बजट कम से कम 307 रुपये महीना तो बैठ ही रहा है। यदि सबसे कम बजट के ऑफर पर संतोष करेंगे तब भी 242 रुपये चुकाने पड़ेंगे और आपकी पसंद के तमाम चैनल इसमें नहीं मिल पाएंगे।
-दून में लिए जाने वाले 250 रुपये का शुल्क में से 110 रुपये लोकल केबल ऑपरेटर के खाते में जाते थे।
-इसके बाद शेष 140 रुपये का हिस्सा एमएसओ व ब्रॉडकास्टर में बंट जाता था। इस तरह सर्वाधिक राशि केबल ऑपरेटर को मिलती थी।
टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने फ्री टू एयर चैनल के हिसाब से भुगतान की व्यवस्था दी है। वहीं, केबल ऑपरेटर अपने तरीके से पैक बनाकर ग्राहकों पर थोप रहे हैं। इसमें प्लेटिनम,गोल्ड और इंडिया कॉस्ट पैक तैयार किए गए हैं। ट्राई के नए सिस्टम के तहत कुछ केबिल ऑपरेटर उन ग्राहकों से भी केवाइसी (नो योर कस्टमर) करा रहे हैं, जो पहले ही प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। केवाइसी के नाम पर सौ से ढाई सौ रुपये तक का अवैध शुल्क लेने की शिकायत भी कई नए ग्राहक कर रहे हैं।
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