उत्तराखंडखबर इंडिया

जीत के जश्न के बीच उत्तराखंड कांग्रेस में कोहराम!

2019 के लिए खतरे की घंटी तो नहीं कांग्रेस का ये कलह?

जीत के जश्न के बीच उत्तराखंड कांग्रेस में कोहराम!

सतह पर आ गई है खेमेबाजी, इन नेताओं के तेवर तल्ख

2019 के लिए खतरे की घंटी तो नहीं कांग्रेस का ये कलह?

देहरादून। मध्यप्रदेश, राजस्थान, और छतीसगढ़ में ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में कांग्रेस जीत का जश्म मना रही है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। लेकिन यहां जीत के जश्न के साथ गुटबाजी भी खूब देखने को मिली। यह कोई पहला मौका नहीं है इससे पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आ चुकी है। आजकल भी कांग्रेस में महाभारत की स्थिति बनही हुई है। जीत के जश्न में कांग्रेसियों ने आतिशबाजी और गुलाल लगाकर दिवाली से लेकर होली तो खेली लेकिन इस दौरान हरीश रावत गुट नदारद रहा और जो लोग आए वो भी परायों की तरह दूर से जश्न देखते रहे। कभी हरीश रावत के नाम से गुंजायमान रहने वाला उत्तराखंड कांग्रेस का मुख्यालय भवन हरीश रावत के नाम को तरसता दिखा। कांग्रेस भवन में लगाए गए नारों में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, कांग्रेस पार्टी के साथ प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के जिंदाबाद के नारे तो लगाए गए लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय उपाधध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रहे हरीश रावत का नाम किसी ने नहीं लिया। अपनों में बेगाने से नजर आ रहे पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट इस स्थिति से खुश नहीं दिखे। उन्होंने विधानसभा चुनावों में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय राहुल गांधी के नेतृत्व के अलावा जीतने वाले राज्य में पार्टी में बेहतर सामंजस्य को भी दिया। इसके साथ ही बिष्ट ने यह भी कहा कि पार्टी में बेहतर तालमेल और सांमजस्य की जरूरत राज्य में भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य का नेतृत्व सभी को साथ लेकर चलेगा ताकि 2019 में आने वाली चुनौती का सामना सब मिल-जुलकर बेहतर तरीके से कर सकें।

कांग्रेस में कोहराम की बड़ी वजह
कांग्रेस में मची खींचतान की बजह है एक गुटविशेष के कार्यकर्ताओं पर गाज गिरना। निकाय चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों पर निष्कासित किए गए पदाधिकारियों को लेकर पार्टी की खेमेबाजी एक बार फिर सतह पर आ गई है। हरीश रावत खेमे ने जहां मोर्चा खोल दिया है। हल्द्वानी में जिस तरह से विधानसभा में उपनेता करण माहरा ने तेवर दिखाए हैं, वह साफ करते हैं कि मामला सामान्य नहीं है। इन स्थितियों के बीच, आज से राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत का कुमाऊं दौरा भी शुरू हो रहा है। हालांकि वह पारिवारिक कार्यक्रमों के सिलसिले में कुमाऊं पहुंच रहे हैं, मगर मोर्चा खोलने वाले कांग्रेस नेताओं को इससे ऊर्जा मिलना तय है। दूसरी तरफ, कांग्रेस की चिंता 16 दिसंबर को प्रस्तावित अहम बैठक को लेकर भी बढ़ गई है, जिसमें संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर प्रदेश के सभी महत्वपूर्ण नेता जुट रहे हैं। पार्टी ने एहतियातन उपाय करने के लिए माथापच्ची करनी शुरू कर दी है।

इन नेताओं पर गिरी गाज
कांग्रेस ने नगर निकाय चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने पर इस बार चार बडे पदाधिकारियों पर गाज गिराई है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने नैनीताल के नगर अध्यक्ष मारूति शाह, चमोली जिला कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष संजय रावत, अनुसूचित जाति विभाग के रुद्रप्रयाग जिलाध्यक्ष कुंवर लाल आर्य और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महामंत्री खजान पांडेय को छह साल के लिए निष्कासित किया है। निष्कासित किए गए ज्यादातर नेता हरीश रावत खेमे के हैं। खजान पांडेय के खिलाफ कार्रवाई के लिए नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश दबाव बनाए हुए थीं। नेता प्रतिपक्ष शुरू से ही हल्द्वानी नगर निगम के मेयर पद के चुनाव में अपने पुत्र सुमित की हार के लिए हरीश रावत खेमे के ऊपर आरोप लगा रही हैं। इन स्थितियों के बीच, इस बार प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के फैसले पर पलटवार करने के लिए करण माहरा सामने आए हैं।

कुंजवाल ने भी खोला था मोर्चा
इससे पहले, संगठनात्मक नियुक्तियों पर पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने विरोध की कमान संभाली थी। माहरा ने हल्द्वानी में प्रेस कान्फ्रेंस करके प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर सीधे तौर पर सवाल उठाए हैं। 16 दिसंबर की प्रस्तावित बैठक में भी मामले को उठाने की बात कही है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस की रार बढ़ने की स्थिति ही पैदा हो रही है।

कांग्रेस में कलह पर सूर्यकांत धस्माना का बयान
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना का कहना है कि निकाय चुनाव में जो लोग पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे, उन पर गहन जांच के बाद कार्रवाई की गई है। खजान पांडेय के खिलाफ खुद नेता प्रतिपक्ष की शिकायत मिली थी, जबकि नैनीताल नगर अध्यक्ष के खिलाफ वहां के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिनके भी खिलाफ शिकायतें हैं, यदि वे जांच में सही पाई जाती हैं, तो आगे भी कार्रवाई की जाएंगी। जहां तक अनुशासन समिति के अध्यक्ष के भतीजे से जुड़ा मामला है, उनसे संबंधित विवाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ है। यह विवाद कहीं से भी पार्टी विरोधी गतिविधि का हिस्सा नहीं था।

क्या कहते है प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने क हा कि विधानसभा चुनावों में मिली जीत कार्यकर्ताओं में जोश पैदा करेगी। भाजपा कुप्रचार कर रही थी, राहुल गांधी के नेतृत्व व क्षमता पर सवाल उठा रही थी, जनता ने उसका करारा जवाब दिया है। भाजपा यदि इस हार को राज्य के मुख्यमंत्रियों की हार बताती है, तो यह गलत है। पूरा चुनाव अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नाम पर चलाया गया। यह केंद्र की योजनाओं की भी हार है क्योंकि केंद्र के बैनर तले ही चुनाव लड़ा गया। यह कांग्रेस के लिए 2019 का अच्छा संकेत है। कांग्रेस उत्तराखंड में भी पांचों सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close