उत्तराखंडखबर इंडिया

जमे रहिए मंत्री जी, हम आपके साथ हैं

झुकना मत अपने फैसले पर अडिग रहना

जमे रहिए मंत्री जी, हम आपके साथ हैं

झुकना मत अपने फैसले पर अडिग रहना

देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए एनसीआरटी की किताबें लागू करने का आदेश देकर सराहनीय कार्य किया है। लेकिन इन स्कूलों के पूंजीपति मालिकों को यह पसंद नहीं आ रहा है आखिर किताबों के कमीशन से हर साल होने वाली लाखों-करोडों रुपए की कमाई को इतनी आसानी से कैसे छोड़ सकते हैं ये लोग? इसलिए अब राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
एक ओर जहां निजी स्कूल दबाव बनाने के लिए आंदोलन की राह पर हैं। वहीं स्कूलों की दादागिरी से परेशान जनता धीरे-धीरे शिक्षा मंत्री के साथ खड़ी हो गई है। सोशल मीडिया के माध्यम से इसके लिए व्यापक मुहिम चलाई जा रही है। अभिभावक एक-दूसरे से इस मुहिम में शिक्षा मंत्री का साथ देने और निजी स्कूलों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई छेड़ने के लिए समर्थन की मांग कर रहे हैं। एक अविभावक सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि यही समय है जब जनता को एकजुट होकर शिक्षा मंत्री का साथ देना होगा। अभी समान शिक्षा प्रणाली की ओर पहला कदम उठाया गया है। अगर इस वक्त हम शिक्षा मंत्री का साथ नहीं देंगे तो भविष्य में कोई भी शिक्षा मंत्री निजी स्कूलों की इस सामूहिक लूट के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस नहीं कर पाएगा। हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में इन स्कूलों द्वारा विभिन्न प्रकार की अनावश्यक फीस जमा करवाकर अविभावकों की जेब काटने के मंसूबों पर भी लगाम लगाई जाएगी। अगर ये स्कूल अविभावकों से फीस लेकर हड़ताल पर जाते हैं तो सड़कों पर उतर कर इनका विरोध किया जाना चाहिए और माननीय उच्च न्यायालय में भी जनहित याचिका दायर की जानी चाहिए। इस तरह के व्यापक जनहित से जुड़े मामलों में माननीय हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट कई बार स्वयं भी संज्ञान ले लेते हैं। जमे रहिए मंत्री जी, हम आपके साथ हैं।बडी संख्या में सोशल मीडिया में लोग इस तरह के मैसेज शिक्षा मंत्री अरंविद पांडेय के समर्थन में लिख रहें हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से निजी स्कलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों को एकजुट किया जा रहा है। 

निजी स्कूल की मनमानी जारी, अभिभावक परेशान

राज्य सरकार के नए सत्र से एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के फैसले के बावजूद निजी स्कूल मनमानी पर उतारू हैं। स्थिति यह कि स्कूल अभिभावकों को न केवल प्राइवेट पब्लिशर की किताबें खरीदने को बाध्य कर रहे हैं, बल्कि किताबें लेनी भी निश्चित दुकान से हैं। उन्हें रिजल्ट के साथ ही पर्ची थमा दी गई है। जिसके बाद अभिभावक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। स्कूल ने जो दुकान तय की है, उससे इतर कहीं यह किताबें मिल भी नहीं रही हैं। ऐसे में अभिभावक सुबह से ही किताबें लेने के लिए लाइन में लगे हैं। एनसीईआरटी की किताबें पर्ची से गायब होने पर अभिभावक हैरान हैं। लेकिन बच्चों के भविष्य के कारण वह कुछ बोल नहीं पा रहे। ये हाल तब है जब शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सभी सरकारी व निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। वह यह साफ कर चुके हैं कि सरकारी व निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबों को लागू करने में कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने सत्र शुरू होने से पहले ही निजी स्कूल संचालकों से वार्ता के भी निर्देश दिए थे। जिसके बाद विभाग ने ऐसा किया भी, लेकिन इसका रिजल्ट मिलता नहीं दिख रहा है। निजी स्कूल के हड़ताल पर चले जाने से मामला अब उलझता हुआ दिखाई दे रहा है। सरकार ने अगर सख्ती से अपना फैसला लागू करवा दिया तो पूरे प्रदेश से व्यापक जनसमर्थन सरकार के साथ होगा। ऐसे में नगर निकाय ही नहीं 2019 के विधानसभा चुनावों पर भी इसका असर पड़ेगा। निजी स्कूलों की मनमानी से परेशान जनता भाजपा सरकार के साथ खड़ी हो सकती है। अब फैसला सरकार को करना है।

Show More

Related Articles

One Comment

  1. शिक्षा मंत्री जी आप संघर्ष करो जनता आपके साथ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close