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खजुराहो के रहस्य जिसे सुनते ही हो जाएंगे दंग

खजुराहो के दर्शन के बिना अधूरा है भारत-दर्शन

खजुराहो के रहस्य जिसे सुनते ही हो जाएंगे दंग

खजुराहो के दर्शन के बिना अधूरा है भारत-दर्शन

अद्भुत अविश्वसनीय अकल्पनीय, खुजराहो के मंदिरों को पहली बार जो देखता है वह यही बोलता है। खुजराहो के अजब-गजब और कलात्मक मंदिरो को आप जितनी बार भी देखें, यह हर बार अपने नयेपन का अहसास कराते हैं। खजुराहो बुन्देलखण्ड में स्थित एक ऐसा स्थल है जो अतीत के स्वर्णिम साध्य के साथ वर्तमान के सामने गौरवपूर्ण मुद्रा में खड़ा है। मध्य प्रदेश का एक प्रमुख शहर खजुराहो, भारतीय आर्य स्थापत्य और वास्तुकला की एक नायाब मिसाल है। खजुराहो के कलात्मक मंदिर दुनिया के लिए एक अनमोल तोहफा हैं। यहां की कलाकृतियां उस समय की कारिगरी का नायाब नमूना है। खजुराहो में चंदेल राजाओं द्वारा बनवाए गए खूबसूरत मंदिरो में की गई कलाकारी इतनी सजीव है कि कई मूर्तियां सजीव प्रतीत होती हैं। इन्हीं खूबियों के साथ खजुराहो के मंदिर से जुड़े चोकाने वाले रहस्य जिसे सुनते ही हो जाएंगे दंग।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूचि में शामिल
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूचि में शामिल यह मंदिर मध्य प्रदेश के छत्तरपुर जिले में स्थित है। खजुराहो, भारतीय आर्य स्थापत्य और वास्तुकला की एक नायाब मिसाल है। चलिए जानते हैं खजुराहो की कुछ ऐसी ही दिलचस्प बातों के बारे में। कामुक मूर्तियां जैसा कि खजुराहो के मंदिरों के बारे में आम धारणा है कि ये मंदिर कामुक मूर्तियों से भरे पड़े हैं, पर इसके विपरीत यहाँ सिर्फ 10 प्रतिशत ही ऐसी कामुक मूर्तियां वर्णित हैं, बाकि मूर्तियों में मनुष्य की रोजाना की जिंदगी और दिन चर्या को दर्शाया गया है, जैसे कुम्हार और किसान काम करते हुए, संगीतकार गीत गाते हुए, स्त्रियां वस्त्र पहनती हुईं आदि।

तीन भागों में विभाजित हैं मंदिर
मंदिर के अंदर सारे कमरे पूर्व से पश्चिम की ओर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। हर एक कमरे में एक प्रवेश द्वार, एक हॉल, एक मंदिर और एक गलियारा बना हुआ है। देवी देवताओं की छवियां खजुराहो मंदिर में बनी देवी देवताओं की छवियाँ विभिन्न अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित करते हैं जैसे, शिव और शक्ति, येन और यांग, महिला और पुरुष सिद्धांत आदि। मंदिर का विभाजन खजुराहो के मंदिरों के समूह को तीन भागों में विभाजित किया गया है- पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी।

खजुराहो में है लक्ष्मण मंदिर
खजुराहो में लक्ष्मण मंदिर स्थित है। इसका निर्माण लगभग 930 ई. में यशोवर्मन नामक राजा ने कराया था। इनका एक नाम लक्ष्मण वर्मन भी था इसलिए यह मंदिर लक्ष्मण मंदिर कहलाता है। वैसे यह मंदिर भगवान विष्णु का है। पंचायतन शैली में बना हुआ यह मंदिर खजुराहो में अब तक प्राप्त सभी मंदिरों में सबसे सुरक्षित स्थिति में है। कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण के लिए मथुरा से सोलह हजार शिल्पकारों को बुलाया गया था तथा यह मंदिर लगभग सात वर्ष में बनकर तैयार हुआ था।

एकमात्र सूर्य मंदिर
चित्रगुप्त मंदिर राजा धंगदेव वर्मन के पुत्र महाराजा गण्डदेव ने 11वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में बनवाया था। खजुराहो में बने मंदिरों में केवल यही एकमात्र सूर्य मंदिर है। इस मंदिर का नाम चित्रगुप्त नामक उपदेवता के नाम पर पड़ा जिनके बारे में हिन्दू धारणा है कि यह मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। गर्भगृह में स्थित रक्षारूढ़ भगवान सूर्य की प्रतिमा के दाहिने ओर हाथ में लेखनी लिए चित्रगुप्त की खण्डित प्रतिमा है। यह मंदिर निरन्धार शैली में बना है।

सबसे प्राचीन मंदिर ‘‘कंदारिया महादेव मंदिर’’
खजुराहो में सबसे प्राचीन मंदिर ‘‘कंदारिया महादेव मंदिर’’ है। जोकि मध्यकालीन भारतीय स्थापत्य का भव्यतम स्मारक है। यह भारत की सर्वोत्तम वास्तुकृतियों में अपना गौरवपूर्ण स्थान रखता है। यह मंदिर 117 फुट ऊंचा, 117 फुट लंबा तथा 66 फुट चैड़ा है। मंदिर को सामने की ओर से देखने से यूं प्रतीत होता है जैसे कि एक शिखर वाला विशाल पर्वत खड़ा हुआ हो एवं मंदिर का प्रवेश द्वार यू प्रतीत होता है जैसे किसी कन्दरा या गुफा का द्वार हो इसलिए ही इस मंदिर का नाम कंदारिया महादेव अर्थात् कंदरा में रहने वाले शिव पड़ा।

कामुक मूर्तियां को बनाने का रहस्य
मंदिर के बाहर कामक्रिया करती तस्वीरें कई बार श्रद्घालुओं और दर्शनार्थियों को आश्चर्य में डाल देते हैं कि, भोग और मुक्ति का ऐसा मेल क्यों हुआ है। इस विषय में कई कथाएं जिनसे यह भेद खुलता है कि मंदिर की दीवारों पर कामुक मूर्तियां क्यों बनाई गयी हैं।

चन्द्रमा की कामुकता का परिणाम
खजुराहो के मंदिर के निर्माण के बारे मे एक कहानी कही जाती है कि हेमावती एक सुन्दर ब्राह्मण कन्या थी। वह वन में स्थित सरोवर में स्नान कर रही थी। उसे चन्द्रमा ने देख लिया और उस पर मुग्ध हो गया। चन्द्रमा ने उसे वशीभूत कर उससे संबंध बना लिए। इससे हेमावती ने एक बालक को जन्म दिया। लेकिन बालक और हेमावती को समाज ने अपनाने से मना कर दिया। उसे बालक का पालन-पोषण वन में रहकर करना पड़ा। बालक का नाम चन्द्रवर्मन रखा गया। बड़ा होकर चन्द्रवर्मन ने अपना राज्य कायम किया। हेमावती ने चन्द्रवर्मन को ऐसे मन्दिर बनाने के लिए प्रेरित किया जिससे मनुष्य के अन्दर दबी हुई कामनाओं का खोखलापन दिखाई दे। जब वह मन्दिर में प्रवेश करे तो इन बुराइयों का छोड चुके हो।

 खत्म हो रहा था काम कला में उत्साह
एक मान्यता यह भी है कि गौतम बुद्घ के उपदेशों से प्ररित होकर आम जनमानस में कामकला के प्रति रुचि खत्म हो रही थी। इसीलिए उन्हें इस और आकर्षित करने के लिए इन मंदिरों का निर्माण किया गया होगा।

तंत्र-मंत्र में विश्वास
खजुराहों के संबंध में एक जनश्रुति यह भी है कि उस समय बच्चे गुरुकुल में पढ़ते थे। इसलिए उन्हें सांसारिक बातों का ज्ञान कराने के लिए इन मंदिरों का निर्माण कराया गया।

खजूर के नाम पर पड़ा खुजराहो
खजुराहो शहर का नाम खजूर के नाम पर पड़ा क्यूंकि शहर की बाहरी दीवारें खजूर के पेड़ से घिरे हुए थे। प्राचीन समय में खजुराहो, खजूरपुरा के नाम से जाना जाता था। बलुई पत्थर से निर्मित मंदिर खजुराहो के ज्यादातर मंदिर गुलाबी, बादामी और पीले रंगों के साथ बलुई पत्थर से बने हुए हैं। विकृत मंदिर मध्यकालीन युग में यहाँ 85 मंदिर हुआ करते थे, जिमें से अभी यहाँ सिर्फ 22 मंदिर बचे हुए हैं। बाकि मंदिर प्राकृतिक आपदाओं के कारण ध्वस्त हो चुके हैं।

सर्वश्रेष्ठ संरक्षित स्मारक
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा खजुराहो के स्मारकों को प्राचीन काल के सबसे अच्छे संरक्षित स्मारक घोषित किये गए हैं। मंदिरों का पुनः अविष्कार खजुराहो के मंदिर जिनका निर्माण मध्यकाल में हुआ था, इन्हें फिर से 20वीं सदी में पुनः खोज निकाला गया जिसके बाद इन्हें संरक्षित किया गया। वास्तु प्रतिभा का सबसे बेहतरीन नमूना खजुराहो के मंदिरों को मध्यकालीन काल के दौरान का भारतीय वास्तु प्रतिभा का सबसे बेहतरीन नमूना माना जाता है।

 

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One Comment

  1. क्या बात है भाई साहब, जीवन का असली मजा आप ही ले रहे हो, आप के कारण ही हम भी घर बैठे बैठे अच्छी अच्छी जगहों के दर्शन कर लेते हैं

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