उत्तराखंडखबर इंडिया

निकाय चुनाव को लेकर आमने-सामने निर्वाचन आयोग और त्रिवेन्द्र सरकार

राज्य निर्वाचन आयोग ने लगाया सरकार पर गंभीर आरोप

उत्तराखंड सरकार नहीं चाहती समय पर निकाय चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग ने लगाया सरकार पर गंभीर आरोप

देहरादून- उत्तराखंड में निकाय चुनाव पर सियासी पारा पूरे ऊफान पर है। सत्ता और विपक्ष के बीच चल रहे चुनावी दंगल में निर्वाचन आयोग के शब्दभेदी बाणों ने सभी को चित करके रख दिया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने सूबे की त्रिवेन्द्र सरकार पर निकाय चुनाव को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुबर्धन शाह ने दो टूक कहा कि सरकार निकाय चुनाव समय पर हों इसके लिए कतई गंभीर नहीं है।

सीएम ने नहीं दिया मिलने का समय
त्रिवेन्द्र सरकार निकाय चुनाव को लेकर कितना गंभीर है, इस बात का पता निर्वाचन आयुक्त के इस बयान से चलता है जिसमें उन्होंने कहा कि वह निकाय चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से जुलाई 2017 से समय मांग रहे हैं लेकिन उन्हे आज तक निकाय चुनाव को लेकर मुलाकात का समय नहीं दिया गया।

शहरी विकास मंत्री ने नहीं सुनी बात
निर्वाचन आयुक्त सुबर्धन शाह ने सीएम के साथ ही शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव को लेकर उनकी शहरी विकास मंत्री से भी कई बार बात हुई और उन्होंने शहरी विकास मंत्री से कहा कि परिसीमन प्रक्रिया से निकाय चुनाव प्रभावित होंगे। लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी और आज तक निकाय चुनाव को लेकर कुछ भी ही किया गया। न ही परिसीमन पूरा हुआ और न अभी आरक्षण तय हो पाया है।

हाईकोर्ट गया निर्वाचन आयोग
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि आयोग ने 9 मार्च को निकाय चुनाव का एक कार्यक्रम सरकार को भेजा था जिसमे सरकार से 2 अप्रैल तक अपना काम पूरा करने को कहा गया है, लेकिन अब सरकार ने कहा कि 9 अप्रैल तक वो अपना काम पूरा कर लेगी। लेकिन आयोग को नहीं लगता सरकार 9 अप्रैल तक काम पूरा कर पायेगी इसलिए मजबूरन आयोग हाईकोर्ट जा रहा है, आज सुनवाई है।
वहीं हाईकोर्ट ने भी आज मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग की इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने के आदेश पारित किए हैं। कोर्ट ने चुनाव को लेकर आयोग के रवैये को भी सही नहीं माना। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि सरकार नियत समय में चुनाव नहीं कराती तो आयोग कोर्ट जा सकता है। याचिका में राज्य में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई है।

17 करोड़ रुपए मांगे लेकिन 17 पैसा भी नहीं मिला
वहीं उन्होंने कहा कि हमने सरकार को कहा कि हम वीवीपीटी से चुनाव करवाना चाहते है। इसके लिए सरकार से 17 करोड़ रुपए मांगे लेकिन 17 पैसा भी नही मिला। राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार के निकाय चुनाव तय समय पर नहीं करवाना चाहती है लेकिन लोकतंत्र में चुनाव जरूरी है। चुनाव 3 मई से पहले होने हैं लेकिन सरकार सहयोग नहीं कर रही है। इसलिए हमें कोर्ट में जाना पड़ा। अब कोर्ट तय करेगा कि प्रदेश में निकाय चुनाव कब होंगे। प्रदेश में 2381200 मतदाता हैं। वहीं साल 2015 में 1536817 वोटर थे।

 

मदन कौशिक ने किया सरकार का बचाव

मीडिया सेंटर में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने राज्य सकरार का पक्ष रखते हुए कहा कि हमारी सरकार पारदर्शी तरीके से निकाय चुनाव कराना चाहती है। हमारी निर्वाचन आयोग से बिंदुवार बैठक हुई थी।
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयुक्त सीएम से भी मिले हैं। निर्वाचन आयुक्त द्वारा यह कहना गलत है कि समय नहीं दिया गया। यहीं नहीं तमाम अधिकारियों के साथ उनकी बैठकें होती रही हैं। ऐसे पदों पर बैठे लोगों की अगर कोई पीड़ा होगी तो उसका समाधान हो सकता था। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार की मंशा साफ है और हम तमाम प्रक्रियाओं में लगे हुए हैं। हम न्यायालय के आदेश का पालन कर रहें हैं और इससे इत्तर कोई काम नहीं कर सकते हैं।

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