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उत्तराखंड में बिजली चोरी मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

यूपीसीएल में मचा हड़कंप, छोटे से लेकर बड़े इन अधिकारियों पर गिरी गाज

उत्तराखंड में बिजली चोरी मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

यूपीसीएल में मचा हड़कंप, छोटे से लेकर बड़े इन अधिकारियों पर गिरी गाज

देहरादून। उत्तराखंड में बिजली चोरी में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है। बिजली चोरी में दोषी पाये गये छोटे से लेकर बड़े हर अधिकारी पर गाज गिरी है। गदरपुर यशोदा राइस मिल बिजली चोरी मामले में सचिव ऊर्जा राधिका झा के आदेश पर बड़ी कार्रवाई की गई है।गौरतलब है कि गदरपुर में रविवार को बड़ी बिजली चोरी सामने आई। यहां यशोदा फ्लोर मिल मालिक की ओर से 11केवी लाइन से अपने निजी ट्रांसफार्मर को जोड़कर महीनों से बिजली चोरी की जा रही थी। 20 अप्रैल की रात को विजलेंस और विद्युत विभाग की टीम ने मिल में छापा मारा तो वहां लगभग 100 किलोवाट बिजली चोरी पकड़ में आई। यशोदा फ्लोर मिल के मलिक अजय पांडेय द्वारा सीधे 11केवी विद्युत लाइन में अपना निजी 800 एमवीए का ट्रांसफार्मर जोड़कर कई महीनों से रात के समय बिजली चोरी की जा रही थी। चोरी पकड़ने पर ऊर्जा निगम ने तत्काल जूनियर इंजीनियर महेंद्र कुमार, एसएसओ नारायण सिंह को निलंबित कर दिया। जबकि सेल्फ हेल्प ग्रुपके एसएसओ उमेश कुमार की सेवा समाप्त कर दी।

वही सचिव ऊर्जा राधिका झा के आदेश पर अब इस मामले में सुप्रिटेंडेंट इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और एसडीओ को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, चीफ इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है। इसके साथ ही निदेशक परिचालन को तीन दिन में मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। झा ने ये भी निर्देश दिए हैं कि यूपीसीएल में लंबित पड़े सभी जांचों को अगले 15 दिनों में पूरा किया जाए। उनका साफ कहना है कि बिजली चोरी में बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

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