उत्तराखंडखबर इंडिया

उत्तराखंड में धन लेकर सम्मानित करने की कुप्रथा का अंत कब होगा?

आखिर किसने कहा, धन देकर ही अर्वाड मिलेगा तो फिर यह कैसा सम्मान?

उत्तराखंड में धन लेकर सम्मानित करने की कुप्रथा का अंत कब होगा?

आखिर किसने कहा, धन देकर ही अर्वाड मिलेगा तो फिर यह कैसा सम्मान?

भानु प्रकाश नेगी, वरिष्ठ पत्रकार
भानु प्रकाश नेगी, वरिष्ठ पत्रकार
हे परम सम्मानितों तुमको सत-सत नमन………
उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों से सम्मान और पुरस्कार लेने वाले व्यक्ति और देने वाली कई संस्थाओं व आयोजकों पर बड़ा प्रश्नचिन्ह सा लग गया है। पहले यह बातें गुपचुप होती थी अब धीरे-धीरे सार्बजनिक होने लगी हैं। इसमें सोशल मीडिया की भी अहम भूमिका है। जितनी मोटी रकम दोगे उतने नम्बर का पुरस्कार यानि सम्मान आपको मिलेगा। धन देकर मुख्य अतिथि बनने की परम्परा तो अब पुरानी हो चुकी है। मेरे मित्र जो प्राइवेट अस्पताल के नामी डाॅक्टर है, ने बताया कि एक बड़े बैनर से उन्हें फोन आया कि डाॅक्टर साहब आप बहुत अच्छा काम कर रहे हो अगर आप 50 हजार से ज्यादा की रकम देगें तो आपको मुख्यमंत्री जी के हाथों सम्मान दिलायेंगे, वैसे यह सम्मान समारोह हम हर साल करते है, डाॅ साहब बोले कि अगर धन देकर ही सम्मानित होना है तो वह कैसा सम्मान होगा! यह तो ठीक वैसे ही हो गया कि किसी बड़े लाला के हाथों चमचमाता बर्तन (सामान) घर ले आयें, मैने मना कर दिया ।
कुछ ऐसी संस्थायें भी हैं जो पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ पुरूस्कारों का वितरण कर रही हैं। हर साल इन पुरूस्कारों को पाकर पाने वाला व्यक्ति भी गर्व की अनुभूति करता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में कुछ लोगों ने अर्जी- फर्जी नामों से अर्वाड देने को अपना धंधा बना लिया है। इसके लिये वह व्यक्ति भी बराबर के जिम्मेदार हैं जो अवार्ड लेने के बदले पैंसे देते हैं।  जिन लोगों का वास्तव में सम्मान होना चाहिए। उन्हें कोई पांच रूपये की चकलेट देने को राजी नहीं है, जिन्होंने छल कपट, धोखाघड़ी कर देश व समाज को ठगा है। उन्हें कई तरह के पुरस्कार धन के बदले दिये जा रहे हैं। क्योंकि वो सम्मान के लिए मोटी रकम देते रहे है। कुछ तथाकथित समाजसेवियों ने हर साल पुरस्कार का ड्राम रचा हुआ है। जिसका मुख्य उद्देश्य धन अर्जित करना है। धिक्कार है ऐसे लोगों को जो समाज को इस तरह से भ्रमित कर भटकाने मै लगे हुए है। मेरी सोच है कि ऐसे लोगों का चेहरा बेनाब कर सलाखों के अन्दर कर देना चाहिए।
Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close