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उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे बाशिंदे

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सपनों को पलीता लगाता पेयजल विभाग

उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे बाशिंदे

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के सपनों को पलीता लगाता पेयजल विभाग

पौड़ी में गहराया जल संकट, कई किलोमीटर दूर से लाते हैं पीने का पानी

आशीष नेगी, खोजी पत्रकार।
 आशीष नेगी, खोजी पत्रकार।

पौड़ी गढ़वाल। बारिश व उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर बर्फबारी के बावजूद पहाड़ के कई हिस्से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पेयजल को लेकर सबसे खराब हालत पौड़ी जनपद में देखने को मिल रही है। पौड़ी शहर के साथ ही आस-पास के इलाकों में पेयजल संकट छाया हुआ है। मंडल मुख्यालय पौड़ी से मात्र 15 से 20 किलोमीटर की दूरी पर खात्सयू पट्टी में हर बार की तरह इस बार भी गर्मियां शुरू होते ही पेयजल संकट शुरू हो गया है। खात्सयू पट्टी के ग्रामीण दो बूंद पीने के पानी को तरस रहे हैं। जिसके चलते ग्रामीण तीन से चार किलोमीटर दूर जाकर पीने का पानी लाने को मजबूर हैं। आलम ये है कि यहां के बच्चों से लेकर महिलाएं और बुजुर्ग भी दूर दराज से पानी ढोने को मजबूर हैं।

इन दिनों पीने के पानी का संकट
पौड़ी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की किल्लत कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पीने के पानी के लिये ग्रामीण या तो नलकूप के सहारे हैं या फिर गदेरों के पानी के सहारे. पीने के पानी के लिये लोगों को सुबह से ही शाम हो जाती है पर फिर भी कईं लोगों को पीने का पानी नसीब तक नहीं होता है। पौड़ी के परसुंडाखाल, घुड़दौड़ी, गगयारस्यू, घंडियाल, में जलस्त्रोतों के सूख जाने के कारण इन दिनों पीने के पानी का संकट छाया हुआ है। लोगों को कईं किलोमीटर दूर से पीने का पानी ढोना पड़ रहा है। पूरा वक्त पीने का पानी लाने, जमा करने में बीत जाता है। गर्मी बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है।

घंडियाल में पानी को लेकर मचा हाहाकार
पौड़ी से लगते हुए घंडियाल में पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। पेयजल लाईने होने के बावजूद यहां भी 4 से 5 दिन तक पानी नहीं आता है। ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। रिवर्स पलायन कर पहाड़ों में स्वरोजगार शुरू करने वाले बरिष्ठ पत्रकार राकेश बिजल्वाण भी पेयजल संकट से काफी ब्यथित दिखाई दिये। वर्तमान में पौड़ी के घंडियाल में रह रहे वरिष्ठ पत्रकार राकेश बिजल्वाण ने बताया कि इस इलाके के लिये पानी एक गंभीर समस्या बना हुआ है। पानी की पाईप लाइन विछी हुई है पर उसमें भी हफते में एक बार पानी आता है। स्थानीय लोगों से जब उन्होेंने इस बारे में बात की तो उन्हें बताया गया कि यह आये दिन खराब होती रहती है। कभी पाईप लाइन में पन्नी फंसी हुई मिलती है कभी लकड़ी। उनकी समझ में नहीं आता कि यह आये दिन कैसे हो जाता है। कुछ लोगों ने कहा कि अगर पाईप लाइन ठीक कराने के लिये पलंबर को बुलाते हैं तो एक बार बुलाने के 300 से 400 रूपये देने पड़ते हैं, ऐसे में वह हफ्ते-हफ्ते 300-400 रूपये कहां से लेकर आयेंगे। कुछ ग्रामीणों ने तो सीधे पेयजल विभाग के कर्मचारियों पर आरोप लगाये कि जानबूझकर पाईप लाईन को खराब किया जाता है।  अवैध कमाई के लिये पाईप लाइनों में पाॅलीथीन की पन्नी और लकड़ी फंसा दी जाती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाये कि छोटे से लेकर बड़े कर्मचारियों की इसमें मिलीभगत रहती है।  अगली बार हम आपको बतायेंगे कौन-कौन हैं वो कर्मचारी जिन पर ग्रामीणों को शक है। 

वरिष्ठ पत्रकार राकेश बिजल्वाण का कहना है कि
आपको बता दें कि पौड़ी गढ़वाल जनपद की खातस्यूं पट्टी के अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां प्रदेश बनने के बाद से अब तक पानी की पाइप लाइन ही नहीं आई है। जिस कारण गर्मियों में भी इन गांवों में टेंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जाता हैं। घंडियाल के पानी ढोने वाले लोगों का कहना है कि इस गांव में पानी की कमी से सभी को काफी परेशानी होती है। वहीं ग्रामीणों ने पेयजल विभाग ये पानी की लाइने दुरूस्त करने की मांग उठाई है। ग्रामीण महिलाओं का कहना हैं कि कई बार पानी की मांग को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा विभाग का घेराव भी किया गया, लेकिन उसके बाद भी गांव में पानी को लेकर कोई उचित कार्रवाही नहीं की गई। वरिष्ठ पत्रकार राकेश बिजल्वाण का कहना है कि अगर पहाड़ को बचाना है तो हर क्षेत्रों में सरकार को मूलभूत सुविधा देनी होगी, जिससे पहाड़ का पलायन रुक सके।

पेयजल मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश जल स्रोतों के सूखने से पानी की किल्लत बढ़ गई है। पेयजल मंत्री का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में विभाग द्वारा टैंकरों के माध्यम से पानी सप्लाई किया जायेगा।

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