उत्तराखंडखबर इंडिया

उत्तराखंड की इन महिला शिक्षकों की सोच को सलाम

धरती पर भगवान का रूप हैं उत्तराखंड के ये महिला शिक्षक

त्तराखंड की इन महिला शिक्षकों की सोच को सलाम

धरती पर भगवान का रूप हैं उत्तराखंड के ये शिक्षक

सोशल मीडिया को बनाया समाज सेवा का सशक्त माध्यम

देहरादून। आज बात उन शिक्षकों को जो समाज के लिए आईना है। जिनकी सकारात्मक सोच ने समाज के अंदर बड़े बदलाव की शुरूआत की है। वर्तमान दौर में जहां समाज मे शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर लोग तरह तरह की उंगलियां उठाते हैं, उन सबको शिक्षकों का एक समूह वो आईना दिखाने का काम कर रहा है, जिसके आधार पर पुरातन काल से ही गुरु को भगवान से बड़ा दरजा दिया गया है। कुछ शिक्षकों के समूह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अभी तक ऐसे कई अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया है। जिसको कई बड़ी-बड़ी सरकारी योजनाएं, जनप्रतिनिधि या समाजसेवी भी नही कर पाए हैं।

बच्चों के लिए भगवान हैं ये शिक्षक
जनपद टिहरी गढ़वाल से मनोज किशोर बहुगुणा, चंपावत से रवि बगोटी, उत्तरकाशी से अनिल बडोनी, हरिद्वार से ज्योति सिंह, पिथौरागढ़ से अनीता उपाध्याय, नैनीताल से नमिता सुयाल भट्ट अल्मोड़ा से हिमांशु चैहान, पौड़ी से सरिता उनियाल आज ऐसे नाम बन रहे हैं जिनकी ओर किसी भी विपत्ति में नजर दौड़ाने वाला छात्र या छात्रा खुद को सुरक्षित समझने लगा है।

इन सभी सामान्य नामों के साथ प्रदेश का एक बड़ा शिक्षक वर्ग असहाय एवं रोगग्रस्त छात्रों की मदद के लिए हर समय तत्पर है। इन शिक्षकों द्वारा किसी भी छात्र को बीमारी या किसी अन्य प्रकार की आवश्यकता की स्थिति में सोशल मीडिया, व्हाट्सअप, फेसबुक आदि के माध्यम से सहायता के संदेश पोस्ट किए जाते हैं और फिर जरूरतमंद की हरसंभव मदद की सिलसिला शुरू हो जाता है।

इन गरीब और असाहय बच्चों का कराया ईलाज
इस समूह द्वारा अभी तक ऐसे कई अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, जिसमे छात्रा रवीना की आंखों का इलाज, राजेन्द्र नेगी का दुर्घटना में घायल होने के बाद पूरा इलाज, दीपांशु जोशी, प्राची पडियार, शिक्षक राजेश पांडेय का ब्रेन हेमरेज के बाद सहायता, वर्तमान में घायल छात्र अंकेश डबराल का इलाज। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिसमे यह समूह समाज के सामने एक मिशाल कायम करता जा रहा है। यह समूह आर्थिक सहायता के साथ साथ आवश्यकतानुसार घायलों के लिए रक्त आदि के लिए भी लोगों को प्रेरित कर रहा है, समूह के सदस्य मनोज किशोर बहुगुणा स्वयं निरंतर रक्त दान करके अन्य लोगों को भी रक्त दान हेतु प्रेरित कर रहे हैं। शिक्षकों और समाज द्वारा जिस प्रकार का सहयोग इस समूह को मिल रहा है, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि भारतवर्ष की गुरुत्तर परंपरा का निर्वहन इन शिक्षकों के माध्यम से निरंतर जारी रहेगा और गुरु पद की प्रतिष्ठा और सम्मान निरंतर बना रहेगा।

शिक्षक मनोज बहुगुणा द्वारा दी गई जानकारी पर बनाया गया एक लेख।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close