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उत्तराखंड की इस बेटी के नाम दर्ज हुआ यह अनोखा रिकार्ड

आप नहीं जानना चाहेंगे 11 साल की उस लड़की के बारे में?

उत्तराखंड की इस बेटी के नाम दर्ज हुआ यह अनोखा रिकार्ड

आप नहीं जानना चाहेंगे 11 साल की उस लड़की के बारे में?

अरूण पांडेय
  अरूण पांडेय

देहरादून। ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के’ आपको आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ की यह टैगलाइन जरूर याद होगी। फिल्म ‘दंगल’ की कहानी हरियाणा के मशहूर पहलवान महावीर सिंह फोगाट की जिंदगी पर आधारित थी। जिन्होंने अपनी बेटियों को कभी बेटों से कम नहीं समझा और उसी का परिणाम है कि गीता और बबीता अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। गीता 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में 55 किलोभार वर्ग में कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थी। जबकि उनकी बहन बबीता कुमारी ने कुश्ती के 51 किलो वर्ग में रजत पदक जीता था।
ऐसा ही कुछ एक बार फिर हुआ है, शायद हिन्दुस्तान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। और अपने नाम यह रिकार्ड दर्ज किया है देवभूमि उत्तराखंड की महज 11 साल की लड़की ने। जीं हां देश में स्कूलों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब ब्वॉयज स्कूल ने केवल एक लड़की को दाखिला दिया है।

शिकायना मुखिया के नाम दर्ज हुआ रिकार्ड
द वॉयस इंडिया किड्स में अपनी सुरीली आवाज का जादू चलाने वाली शिकायना मुखिया ऐसी इकालौती लड़की है जो किसी ब्वॉयज स्कूल में लड़कों के साथ पढ़ाई करेगी। शिकायना मसूरी में रहती है और देहरादून के आवासी स्कूल कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज में उसे एडमिशन मिला है। शिकायना के पिता विकास खुद एक गायक हैं और बिना किसी ट्रेनिंग के अपनी गायिकी को आगे बढ़ा रहे हैं। शिकायना ने संगीत अपने पिता से ही सीखा है। वह पहली ऐसी लड़की हैं जो लड़कों के साथ पढ़ेंगी। इससे पहले कभी कोई लड़की इस तरह के स्कूल में लड़कों से साथ नहीं पढ़ी है। शिकायना के स्कूल में आने के बाद यहां के लड़के खासा उत्साहित हैं कि वह एक बेहतरीन कलाकार अब इनके साथ रहने वाली है। 11 साल की शिकायना लड़कों की बीच रहने और पढ़ने वाली एकलौती लड़की होगी। शिकायना ने द वॉयस इंडिया किड्स शो में फाइनल तक पहुंचकर लाखों दिलों को जीता है।

कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल से करेंगी आगे की पढ़ाई
शिकायना की प्रतिभा के सामने आने के बाद अब उसके माता-पिता न कर्नल ब्राउन कैम्ब्रिज स्कूल से संपर्क किया। इस स्कूल की स्थापना 1926 में हुई थी, जिसमें पूर्व प्रधान मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह और अभिनेता राज कपूर जैसी हस्तियां पढ़ी हुई हैं। शिकायना को उनकी प्रतिभा के बल पर इस स्कूल में प्रवेश दिया गया है। शिकायना यहां 7वीं कक्षा में पढ़ाई शुरू करेगी। जिसका शेसन आगामी 12 अप्रैल से शुरु होगा।

देहरादून की इस नन्ही गायिका ने मचाई घूम
टीवी रियालिटी शो वॉयस इंडिया किड्स में देहरादून के पिता-बेटी की जोड़ी आपको याद होगी, जिन्होंने अपने गानों पर पूरे देश को झूमने पर मजबूर कर दिया। पिता-बेटी की ये जोड़ी उत्तराखंड मे ही नही देशभर में खासी पसंद की जा रही है, जीं हा देहरादून के विकास व ङीरा मुखिया की 11 साल की बेटी शिकायना अपनी सुरीली गायकी से पूरे देश में खासी सुर्खियां बटोर ली हैं।

बेटी की कामयाबी पर खुश हैं माता-पिता
क्लास 6 में पढ़ने वाली शिकायना अपनी गायिकी के बल पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गई। शिकायना के पिता विकास खुद एक गायक हैं और बिना किसी फॉर्मल ट्रैनिंग के अपनी गायिकी को आगे बढ़ा रहे हैं। अपने पिता से ही उसे विरासत में संगीत के प्रति लगाव मिला है और कम उम्र से ही वो गीतों को गुनगुनाती आ रही है। संगीत के अलावा वो छोटी कहानियां भी लिखती हैं और अपने छोटे भाई के साथ खेलना भी उसे खासा पसंद है। शिकायना की मां देहरादून के ही कर्नल ब्राउन स्कूल में पढ़ाती हैं। आज ङीरा और विकास अपनी बेटी की अभी तक की कामयाबी से खासे खुश हैं, वो कहते हैं कि, “हमारी बेटी ने इस कड़े मुकाबले में जो मुकाम हासिल किया है वो ही हमारे लिये किसी जीत से कम नही है।”

शिकायना ने की जज हिमेश रेशमिया की नकल
शिकायना के लिये मुकाबले के सबसे यादगार पलों में से है वो पल जब उसने जज हिमेश रेशमिया की नकल की और जजों और लोगों ने उसे खूब पसंद किया। शान, हिमेश, पलक, पपॉन जैसे संगीत के दिग्गजों के सामने परफॉर्म करने के एहसास के बारे में वो कहती है कि, “थोड़ा नर्वस थी, एक्साइटेड भी। मैने ‘कैसी पहेली है ये जिदगी’ गाया और सभी जजों ने मेरी तारईफ की तो काफी अच्छा लगा।”

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