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ईमानदार छवि के एलआईयू इंस्पेक्टर बलवंत सिंह का ट्रांसफर क्यों ?

मुस्तैद खुफिया तंत्र के बावजूद आखिर क्यों गिरी गाज?

ईमानदार छवि के एलआईयू इंस्पेक्टर बलवंत सिंह का ट्रांसफर क्यों ?

मुस्तैद खुफिया तंत्र के बावजूद आखिर क्यों गिरी गाज?

देहरादून। उत्तराखंड अभिसूचना मुख्यालय ने बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले किये हैं। इन तबादलों के बाद सोशल मीडिया से लेकर समाचार पत्रों और टीवी मीडिया में यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि खुफिया तंत्र की सुस्ती के कारण यह ट्रांसफर किये गये हैं। जबकि अगर पूरे मामले की पड़ताल की जाये तो ऐसा कुछ नजर आता नहीं है। यह ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी तरह रूटीन ट्रांसफर प्रक्रिया है। इसके अलावा कुछ नहीं है।
देहरादून में तैनात ईमानदार और तेजतर्रार छवि के एलआईयू इंस्पेक्टर बलवंत सिंह के ट्रांसफर पर भी सवाल खड़े किये गये। सवाल खडा हो रहा है कि ईमानदार छवि के एलआईयू इंस्पेक्टर बलवंत सिंह का ट्रांसफर आखिर क्यों किया गया। समाचार पत्रों के हवाले से लिखा गया कि देहरादून में हुई हालिया कुछ घटनाओं में एलआईयू कर्मचारियों की सुस्ती की गाज उन पर गिरी है। जबकि सूत्रों की माने तो ऐसा कुछ नहीं हैं। जिस रायपुर थाना और कांग्रेस भवन में हुए बवाल की घटना के साथ ही देहरादून में लंबे समय से रहे बांग्लादेशियों की सूचना नहीं मिलने को एलआईयू की विफलता से जोड़कर देखा जा रहा है। जबकि सूत्रों का कहना है कि एलआईयू हर मामले में पहले से ही सर्तक थी और समय पर पूरी खूफिया जानकारी मुहैया करा दी गई थी। एलआईयू की सर्तकता के कारण ही बांग्लादेशियों को पकड़ा गया। इस लिये एलआईयू इंस्पेक्टर बंलवत सिंह की कार्यशैली पर सवाल खड़े करना गलत है। एलआईयू इंस्पेक्टर बंलवत सिंह के कार्यकाल में एलआईयू पहले से तेज और ज्यादा सर्तक हुई है।
इसके साथ ही एलआईयू में व्यापक स्तर पर तबादले हुए हैं। निरीक्षक होशियार चंद चंपावत से एलआईयू चंपावत में नियुक्त किया गया है। श्यामदत्त नोटियाल को एलआईयू टिहरी से एसआईओएस देहरादून, ज्योति पसबोला एलआईयू देहरादून से अभिसूचना मुख्यालय, मनोज असवाल एसईओ उत्तरकाशी से एलआईयू पौड़ी, रमेश सजवाण एसपी क्षेत्रीय कार्यालय से एलआईयू टिहरी, रविंद्र बिजल्वाण एसआईओ देहरादून से मुख्यालय, सुंदर घनघरिया एलआईयू पौड़ी से राजभवन सुरक्षा और संतोष को मंडलाधिकारी रुद्रपुर से एसआईओ हल्द्वानी बनाया गया है। एलआईयू में हुए यह सभी तबादले एक रूटीन प्रक्रिया के तहत हुए हैं।

हम सब साथियों को हमेशा कोशिश करनी चाहिये कि खबरों से किसी की भावना आहत न हों। अगर कभी भूलवश ऐसा हो जाये तो उस खबर का खंडन जरूर प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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