उत्तराखंडखबर इंडिया

इस गाय की ममता देख रो देंगे आप भी

पत्थर दिल स्वार्थी इंसानों, ढोंगियों ऐसी ममता नहीं देखी होगी आपने

इस गाय की ममता देख रो देंगे आप भी

पत्थर दिल स्वार्थी इंसानों, ढोंगियों ऐसी ममता नहीं देखी होगी आपने

ओकांर बहुगुणा, वरिष्ठ पत्रकार
 ओकांर बहुगुणा,  वरिष्ठ पत्रकार

उत्तरकाशी।  यह एक सच्ची घटना है। इसका अक्षर-अक्षर सच है। इस को पढ़ने के बाद शर्म आएगी उन ढोंगियों को अपने आप पर जो ममता का स्वांग करते हैं। माता-पिता को अपने बच्चों के प्रति प्यार पत्नी को पति से प्रेमिका को प्रेमी से प्यार जताते या उसे कष्ट होने पर दुखी होते तो देखा होगा, लेकिन मैं आज आपको एक जानवर की सच्ची कहानी बता रहा हूँ….ये उन पत्थर दिल स्वार्थी इंसानों के लिए महत्वपूर्ण होगी जो मतलबी होते है।

बडकोट में आज एक अजीबोगरीब घटनाक्रम से रूबरू हुआ। मैं टूर पर कहीं जा रहा था कि अचानक मेरी तरफ एक गाय तेजी से विपरीत दिशा से आने लगी मैं अपनी धुन में था। अचानक अपनी तरफ तेजी से बढ़ती गाय को देख कर ठिठका वो मेरे लगेज की ओर लपकी ओर उसे चाटने लगी जबकि उसकी गति इतना तेज थी कि जैसे मैं उसकी किसी प्रिय चीज को ले जा रहा हूं। और वो विरोध के लिये मेरे पास आई हो ,उसकी इस हरकत ओर मेरे चेहरे की उत्सुकता को देख भट्ट मेडिकल वाले मेरे करीबी मेरे पास आये और कहने लगे भाई साहब आप डरो नहीं ये गऊ इसी तरह से हर किसी के पीछ आती है और जब तक वो वाहन या अन्य स्थान पर बैठ नहीं जाता तो उसके पीछे चलती रहती है।

गाय की आखों में थे आंसू
माजरा समझ में नही आया क्यों कि पहेली अबूझ थी मैने पुनः अपना बैग लिया और वापस चलने का उपक्रम करता रहा। गाय मेरे लगेज बैग के टायरों की आवाज सुन उसको चाटने लगी और जब तक मैने अपने बैग को गाड़ी में नहीं डाला तब तक मेरे पीछे रही और बैग को डिग्गी में डालते ही आप विस्वास करें न करे उसकी आँखों से आंसू निकलते मेने और स्थानीय लोगों ने देखे। वो टकटकी लगाए मेरे बैग को देखती रही मानो यह कह रही हो कि मेरे बच्चे को छोड़ दो, छोड़ दो मेरे बच्चे को मत ले जाओ, न मेरी आँखों से तो नहीं, लेकिन हृदय से एक अजीब सी सरसराहट को मैने महसूस किया। जैसे मेरा हृदय द्रवित हुवा हो ।
स्थानीय लोगों से जब मैंने जानकारी जुटाई तो मुझे मालूम पड़ा कि इसका बछड़ा मर गया था। जिसे गो पालक द्वारा इसी के सामने घसीट कर ले जाया गया था। बस यही सदमा इस गाय माता को लगा। जब भी यह किसी बैग वाले को (सिर्फ वो ही बैग जिस पर टायर हो और जिसे जमीन से सरकाकर ले जाया जाता हो) के पीछे चल देती है। सिर्फ इसी आशा में की कहीं ये मेरा बचचा तो नहीं किसी को मारती नहीं है।
आज वास्तव में ममता का असली रूप देखा वो भी एक पशु के अंदर इसी लिए गौ को माता कहा जाता होगा। वरना पशुओं में मादाएं भी होती है लेकिन गाय की बात ही निराली है। आज मानव को देखिए जब तक स्वार्थ होता है ममता के ढोंग होता, स्वार्थ खत्म ढोंग भी खत्म। लख-लख बार धिक्कार है उस गौ पालक को जिसने इस गौ माता को ऐसे खुला छोड़ दिया।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close
Close