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मैदान पंसद अधिकारी का बड़ा कारनामा

पहाड़ विरोधी मानसिकता वालों का कुछ करो “खैरासैंण के सूरज“

  मैदान पंसद अधिकारी का बड़ा कारनामा

पहाड़ विरोधी मानसिकता वालों का कुछ करो “खैरासैंण के सूरज“

अनिल बहुगुणा, वरिष्ठ पत्रकार
 अनिल बहुगुणा, वरिष्ठ पत्रकार

पौड़ी। पहाड़ो की खैरियत को लेकर दुबले होते जा रहे मुख्यमंत्री ने पलायन आयोग का गठन तो कर दिया। लेकिन पहाड़ों से पलायन रोकने में मद्दगार जिस एनआईटी का श्रीनगर के सुमाड़ी गांव में निर्माण होना था, उसके लिए दान में मिली जमीन को एक अदने से अधिकारी ने अपने रखूख का इस्तेमाल कर गैर माफिक करा दिया।
खैरासैंण के त्रिवेन्द्र सिंह रावत पहाड़ों की खैरियत को लेकर कितने चिंतित हैं, उस पर इस अधिकारी ने पूरी तरह से पलीता लगा दिया। यहीं नहीं सीएम की योजना पर यह अधिकारी पलीता लगाकर अब यहां से चलता बना। सुमाड़ी एनआईटी को लेकर आंदोलन लड़ रहे लागों की माने तो इस पहाड़ विरोधी इस अधिकारी को बड़े राजनेताओं की भी शह थी, क्योंकि उनको मैदानी क्षेत्रों से चुनाव लड़ना था। वरना अधिकारी की इतनी हिम्मत कि वह ऐसा कर दे?
सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत कहते हैं कि उत्तराखण्ड में एनआईटी श्रीनगर पूर्व निर्धारित स्थल पर ही बनाया जाएगा। एनआईटी के प्रदेश से बाहर स्थानांतरित होने की कोई वजह नहीं है और राज्य सरकार एनआईटी संचालन और निर्माण में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। वहीं दूसरी तरफ एक अफसर जमीन को अनुपयोगी ठहरा देता है। सवाल खड़ा होता है कि आखिर एक अदने से अधिकारी की इतनी हिम्मत कैसे?

इस अफ़सर ने अपने रसूक का इस्तेमाल कर जमीन ही NIT के लिए गैर उपयोगी ठहरवा दी

देश के इतिहास में शायद ये पहला उदाहरण ही होगा जिसमें देश के एक संस्थान को पहाड़ो में स्थापित करने के लिए ग्रामीणों ने अपनी भूमि दान की। लेकिन पहाड़ो से नफ़रत पाले, मैदान पसन्द इसे पूरा नहीं होने दे रहे। NIT के लिए सुमाड़ी, चडीगॉव और कांडा के ग्रामीणों ने बिना तिज़ारत के 155 हेक्टयर भूमि दान में दे कर अपने अनुवांशिक त्याग का उदाहरण पेश किया था। इस कुल जमा भूमि पर 5900 पेड़ थे, जिनमे से 2000 से अधिक पेड़ो गिरा कर 45 लाख 60 हज़ार ₹ अपने ख़ज़ाने में जमा कर दिया गया। 3 करोड़ खर्च कर भूमि की फेंसिंग भी कर दी गई, लेकिन मैदान पसंद और पहाड़ो से नफ़रत पाले NIT के तत्कालीन प्राचार्य थोराल्ड ने पहाड़ में बन रहे इस संस्थान को नफ़रत भरी निगाहों से देखा और अपनी पूरी ताक़त इस भूमि को गैर माफ़िक करार करने पर आमादा हो गये।

इस आला अधिकारी ने भूमि की जाँच के लिए तयशुदा महखमे IIT रूड़की को प्रभावित करने की कोशिश की पर वहाँ के वैज्ञानिकों के कुल 5 हेक्टयर भूमि को ही माफ़िक नहीं पाया,शेष ज़मी को उपयुक्त ठहरा दिया। पहाड़ो से नफ़रत का आलम ये रहा कि इस अफ़सर ने अपने रसूक का इस्तेमाल कर CPWD के मुख्य अभियंता से पूरी जमीन ही NIT के लिए गैर उपयोगी ठहरवा दी। पहाड़ो की माटी से निकले बजीर और उनके आला इस तरह से पहाड़ो से नफ़रत रखने वालों का कुछ नहीं कर पाये..

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