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इन चिकित्सकों को मिली तबादलों में छूट 

डाॅ एसडी जोशी ने कहा सरकार करे इन सुझावों पर अमल तो पहाड़ के हर सरकारी अस्पताल में होंगे डाॅक्टर

इन चिकित्सकों को मिली तबादलों में छूट 

डाॅ एसडी जोशी ने कहा सरकार इन सुझावों पर अमल करे तो पहाड़ के हर सरकारी अस्पताल में होंगे डाॅक्टर


देहरादून। त्रिवेन्द्र सरकार द्वारा ट्रांसफर पाॅलिसी पर मुहर लगाए जाने के बाद से न सिर्फ तबादलों में पारदर्शिता आई है, बल्कि तबादलों के बडे़ खेल पर भी रोक लग गई है। उत्तराखंड में पिछले 17 सालों में तबादला एक उद्योग बन कर रह गया था, और सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार तबादलों के नाम पर देखने को मिलता था। ट्रांसफर पाॅलिसी के आ जाने के बाद राज्य कर्मचारियों को काफी राहत मिली है। वहीं प्रदेश सरकार ने तबादला एक्ट में रियायत देकर कर्मचारियों को एक बड़ी राहत और दी है।

इन डाॅक्टरों को मिलेगी रियायत
राज्य सरकार ने विशिष्ट चिकित्सा सुविधाओं जैसे साइक्याट्री, टीबी, सेनीटोरियम, रेडियोलाॅजी, से जुड़े चिकित्साधिकारियों को इस वर्ष तबादला एक्ट से बहार रखा है। राज्य सरकार ने चिकित्साधिकारियों के 70 फीसदी पदों को रिक्त देखते हुए साइक्याट्री, टीबी, सेनीटोरियम, रेडियोलाॅजी, और ओंकालाॅजी से जुड़े चिकित्सकों पर मौजूदा ट्रांसफर एक्ट में राहत दी है। इस बाबत प्रमुख सचिव ने शासनादेश जारी कर दिया है। गौरतलब है कि तबादला एक्ट की धारा-6 में वार्षिक स्थानांतरण का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सुगम से दुर्गम और दुर्गम से सुगम में अनिवार्य तबादले की व्यवस्था है। इसके साथ ही अनुरोध के आधार पर तबादलों का भी इंतजाम हैं।

डाॅक्टरों को मिले जरूरी सुविधा और सुरक्षा
राज्य गठन के बाद प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करना सभी सरकारों के लिए चुनौती बनी हुई है। इसके लिए प्रयास तो हुए लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति के अभाव में कोई भी सरकार चिकित्सकों को पहाड़ चढ़ाने में सफल नहीं हो पाई है।प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष डाॅ एसडी जोशी ने कहा कि सरकारी डाॅक्टरों को पहाड़ में काम करने से कोई ऐतराज नहीं है। बड़ी संख्या में डाॅक्टर पहाड़ो पर सेवाएं दे रहे हैं, और भी डाॅक्टर पहाड़ो पर सेवाएं देना चाहते हैं लेकिन सरकार उन्हें जरूरी सुविधा तो मुहैया कराये। डाॅ एसडी जोशी ने कहा कि डाॅक्टरों के बच्चों की बेहत्तर शिक्षा, परिवार और डाॅक्टरों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हों तो कोई डाॅक्टर पहाड़ पर सेवा देने से नहीं हिचकेगा।

हर डाॅक्टर रहेगा पहाड़ चढ़ने को तैयार
प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष डाॅ एसडी जोशी ने कहा कि सरकार पर्वतीय इलाकों में अस्पताल के नजदीक ही डाॅक्टरों के लिए वेल फर्निस्ड हाॅस्टल का निर्माण कराये। इस हाॅस्टल में अन्य विभागों के हाॅस्टल की तरह ही पूरी सुविधाएं मौजूद हों। खाने के लिए कैंटीन की भी उचित व्यवस्था हो। इससे डाॅक्टर को पहाड़ के हाॅस्पिटल में जाने पर कोई दिक्कत नहीं होगी, उसे पता है कि उसे सिर्फ मरीजों का बेहत्तर ईलाज करना है। डाॅक्टर को न सुबह उठकर पानी भरने की चिंता होगी, न देर होने पर खाना कहां से खायें इस बात की। अगर सरकार डाॅक्टरों को पर्वतीय इलाकों में यह जरूरी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराये तो कभी कोई डाॅक्टर पहाड़ के नाम से न नहीं कहेगा।

गौरतलब है कि त्रिवेन्द्र सरकार ने 07 साल या ज्यादा समय से मैदानी क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों को पर्वतीय क्षेत्रों में भेजा गया है, इनकी संख्या करीब 170 बताई जा रही है। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में 14 साल या इससे अधिक अरसे से कार्यरत लगभग 73 डॉक्टरों को मैदानी क्षेत्रों में लाया गया है। सरकार ने तबादला सूची में जिला चिकित्सालयों में विशेषज्ञों की चिकित्सकों की कमी पूरी करने की कोशिश की थी। खासतौर पर पर्वतीय जिलों में विशेषज्ञों को मैदानी क्षेत्रों से भेजा गया है।

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