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आखिर कब होगा राजनीति में अच्छे लोगों का स्वागत?

गणेश गोदियाल जी क्या बुराई है मोहन काला में ?

आखिर कब होगा राजनीति में अच्छे लोगों का स्वागत?

गणेश गोदियाल जी क्या बुराई है मोहन काला में ?

विडम्बना यह है कि हम अपने लोगों को नहीं देते स्पेस

गुणानंद जखमोला, वरिष्ठ पत्रकार।
गुणानंद जखमोला, वरिष्ठ पत्रकार।

देहरादून। जनता राज्य गठन के बाद से सोई हुई है और कुछ राजनीति में पंजीरी खा रहे हैं। कुछ नेता अच्छे हैं तो कुछ ठेकेदार, दलाल और छुटभैये नेता हमारे राज्य की तस्वीर और तकदीर के बादशाह बने हैं। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि राज्य के कुछ नेताओं की सोच छोटी हो गई है। न दिल में जगह और न ही राजनीति में। फिर अच्छे लोग राजनीति में आएंगे कैसे?

सुमाड़ी गांव के एक बच्चे ने जीवन में अथक परिश्रम कर ऐसा मुकाम हासिल किया कि वह आज 50 देशो में अपनी दवा बेच रहा है। वो चाहता तो मुंबई या विदेश में बस सकता था लेकिन वो पहाड़ के लिए काम कर रहा है। केदारनाथ आपदा में यतीम हुए 40 बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्चा उठा रहा है। अपने गांव में बच्चों के लिए निशुल्क स्कूल चला रहा है। सड़कें बनवाता है, गरीब और असहाय लोगों की मदद करता है। संपन्न है और वो दलाली नहीं खाएगा, गारंटी है। वह पहाड़ के लिए काम करता रहा है और करता रहेगा। जी हां हम बात कर रहे हैं मोहन काला की।
सैकड़ों लोगों को उसने अपनी फैक्टरी में रोजगार दिया है। मैं इसलिए इस व्यक्ति का गुणगान नहीं कर रहा हूं कि इसने मुझे ये शब्द लिखने के पैसे दिये हैं। हां, ये व्यक्ति मेरी मदद करता है। लेकिन मैं ईमानदारी से मदद लेता हूं। किसी का दल्ला नहीं हूं। ये पोस्ट इसलिए लिख रहा हूं कि भाजपा सरकार से जुड़ा एक बड़ा नेता इस व्यक्ति को बर्बाद करने की ठाने बैठा है और गणेश गोदियाल इसको कांग्रेस में शामिल होने का विरोध कर रहा है। जबकि गणेश गोदियाल का मैं सम्मान करता हूं क्योंकि उस व्यक्ति ने भी मुंबई के चैंबूर में केले बेच कर जीवन यापन किया और आज भी कांग्रेस में वही ऐसा नेता है जो बिका नहीं, ईमानदार है।
मुझे पता है कि हरीश रावत सरकार के तख्ता पलट के लिए उसकी टेबल में 15 करोड़ कैश पड़े थे और दस करोड़ मुंबई वाले एकाउंट में जमा करने की पेशकस की गई थी, लेकिन वो बिका नहीं। इसलिए कहता हूं कि दिल बड़ा करो गणेश भाई। ऐसा कोई नेता बताओ, जो केदारनाथ में यतीम बच्चों को पढ़ा रहा हो, वहां के ग्रामीणों की सुध ले रहा हो। यतीम बच्चों के साथ दिवाली मनाता हो, उनके चेहरे पर खुशियां लाता हो। बताओ, क्या बुराई है मोहन काला में। आज एक के पीछे एक खड़ा है। ऐसे में क्या गारंटी है कि कांग्रेस का टिकट गणेश गोदियाल को ही मिले? सोचो, सोचो और अपना दिल बड़ा करो गणेश भाई।
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